वाराणसी: कोरोना ने गंगा पुत्रों के रोजी रोटी पर जड़ा ताला

वाराणसी: कोरोना ने गंगा पुत्रों के रोजी रोटी पर जड़ा ताला

वाराणासी। 4 लाकडाउन और फिर लगे अनलॉक 1 ने काशी में नाविकों के किस्मत और रोजी रोटी को पूर्णतः लाक कर दिया है।ढाई महीने से ज्यादे का समय हो गया 3000 से ज्यादे नावों की चप्पू रुकी हुई है।बुधवार सुबह में भी राजेंद्र प्रसाद घाट,दशाश्मेध घाट,शीतला घाट,दरभंगा घाट समेत सभी 84 घाटों खामोशी देखने को मिली।नाविक समाज से शभु साहनी और सहयोगीयो ने डीएम को पत्र भी लिखा,लेकिन महामारी को देखते हुए नावों को गंगा में चलाने की अनुमति नही है।कोई चोरी छिपे चलाता भी है तो कार्यवाही जल पुलिस द्वारा कर दिया जाता है।



 सुभाष माझी ने बताया कि 10 हजार से ऊपर मल्लाह समाज के लोग और 50 हजार से ज्यादे इनसे जुड़े परिजन प्रभावित है।सब्जी,राशन,माल,होटल ,मन्दिरसब कुछ खुल गया।हम गंगा पुत्रो के बारे में कोई सोचने वाले नही है।अब नाविक दूसरे रोजगार की ओर भागेंगे।15 जून के बाद कभी भी बाढ़ की स्थिति आ जाएगी तो वैसे ही दो से तीन महीने नावे खड़ी हो जाएंगी।

पीतल तांबा बर्तन दुकानदार राजू केसरी ने बताया कि घाटों के आस पास 2000 से ज्यादे दुकानें होगी।पर्यटको के न होने की वजह से पीतल के लोटे ,गंगाजल के जरीकेन,माला फूल,हैंडीक्राफ्ट, खाने पीने की दुकानें, कपड़े ,गाईड धंधे से जुड़े करीब 1 लाख से ज्यादे लोग प्रभावित है।नावों के बंद होने से कस्टमर भी नही आते।

वही कल आयी रिपोर्ट के अनुसार 7 लोग पाजिटिव मिले।वही कोरोना से आठवीं मौत भी हो गयी।कुल 291 केस में 214 लोग स्वस्थ होकर घर जा चुके है।हुकुलगंज के 77 वर्षीय रिटायर रेलकर्मी सोमवार को बीएचयू में भर्ती हुए थे।शाम तक सांस फूलने की वजह से मौत हो गयी।कोरोना सैम्पल उनका मंगलवार शाम को टेस्ट में पाजिटिव पाया गया।

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