वाराणसी: भक्तों ने घर पर रहकर मनाया गुरु पूर्णिमा का पर्व

वाराणसी: भक्तों ने घर पर रहकर मनाया गुरु पूर्णिमा का पर्व

वाराणसी। विश्व-विख्यात अघोरपीठ “बाबा कीनाराम स्थल”, रविन्द्रपुरी में गुरू-पूर्णिमा का पर्व आश्रम में रह रहे अनुयायियों ने सादगी के साथ मनाया। यूँ तो बनारस को भगवान् शिव की नगरी कहा जाता है पर इस शहर को संत-महात्माओं का शहर भी कहा जाता है। इस शहर में  गुरूपूर्णिमा का पर्व, अभूतपूर्व श्रद्धा-भक्ति के साथ मनाया जाता है। बनारस  में गुरू-शिष्य परम्परा की रौनक हर जगह देखने को मिलती है , लेकिन औघड़/अघोरी परंपरा का विश्व-विख्यात अघोरपीठ "बाबा कीनाराम स्थल" पर  नज़ारा कुछ अलग ही होता है। भक्तों के लिए यह पहली बार है कि इस गुरूपूर्णिमा के पावन पर्व पर अपने गुरु की चरण वंदना और दर्शन की मनोकामना पूर्ण नहीं हो पाई। इस बार भक्तों ने घर पर ही रहकर गुरुपूर्णिमा का पर्व मनाया।इस दिन अघोर परंपरा के मुखिया और इस स्थान के वर्तमान पीठाधीश्वर, अघोराचार्य महाराजश्री बाबा सिद्धार्थ गौतम राम जी का दर्शन उनके अनुयायियों को वीडियो संदेश के माध्यम से प्राप्त हुआ।   वाराणसी के भेलूपुर थान्तार्गत स्थित, इस गुरूपीठ में, 05 जुलाई को गुरूपूर्णिमा के अवसर पर  देश-विदेश के लाखों श्रद्धालू  अपने गुरू, बाबा सिद्धार्थ गौतम राम जी का दर्शन ऑनलाइन किया। कई अनुयायियों ने गेट बंद होने के कारण आश्रम के मुख्य द्वार पर ही माथा टेका बाबा ने कोरोना की भयावहता से भक्तजनों को दूर रखने के निमित्त पहले ही गुरु पूर्णिमा पर अपने घरों में रहकर घरों पर ही मनाने की अपील की थी। 

अनुयायियों और भक्तों के विशेष अनुरोध पर बाबा सिद्धार्थ गौतम राम जी ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से दर्शन दिया। इस दौरान अपने आशीर्वचन के दौरान पीठाधीश्वर बाबा सिद्धार्थ गौतम राम जी ने कहा कि  “परम पूज्य माँ गुरू... गुरूपूर्णिमा के शुभ अवसर पर सभी समाधियों को नमन् करता हूँ और आप सबकी भलाई के लिए ही इस  वर्ष कोरोना महामारी के कारण किसी कार्यक्रम का आयोजन नहीं किया गया है। फिर भी आशीर्वचन की परम्परा को बनाये रखने के लिए मैं कुछ बातें अवश्य बोलूंगा। आश्रम में रह रहे भक्तगण एवं कांफ्रेंस के माध्यम से  हमारे बीच उपस्थित सभी सज्जन्वृन्द, आदरणीय धर्मबन्धुओं, माताएं एवं प्यारे बच्चों,  गुरू और शिष्य...शिष्य जो अपनी बातें होती हैं, उसको बतलाता है और गुरू उसे अपने कार्यों से, अपने व्यवहारों से उसका विनाश करता है ! तो बंधुओं ! मेरी समाधियों और माँ गुरू से यही विनती है कि आप सभी वैश्विक महामारी से दूर रहें संक्रमण से बचने के सभी नियमों और व्यवहार को अपनाएं  , जो नहीं अपना पा रहे हैं वे प्रयास करें । इस विषम परिस्थितियों में अपने अंदर सद्गुणों का विस्तार करें और अपने अवगुणों को दूर करें , जिससे समाज सुरक्षित एवं स्वास्थ्य बने और सुरक्षित एवं अखण्ड-राष्ट्र की कल्पना हम लोग कर सकें। उन्होंने कहा कि गुरू और शिष्य की परम्परा को चलाने के लिए महत्वपूर्ण कड़ी धैर्य है। यदि आप में धैर्य है तो आप बहुत कुछ पा सकते हैं। आप गुरू के बहुत नज़दीक पहुँच सकते हैं और गुरू को पा सकते हैं। आप धैर्य न खोएं। यदि आप धैर्य खो देंगें तो बहती नदी के सामान हो जायेंगें और आप का कुछ पता भी नहीं चलेगा। इसलिए बंधू कोरोना से जारी इस युद्ध में धैर्य न खोएं और समाज सेवा में जिस रफ़्तार से लगे हैं, लगे रहिये ! इन्हीं चंद  शब्दों का साथ, मैं, आप सभी.....समाधियों की तरफ़ से और अपनी तरफ़ से आप सभी को आशीर्वाद देता हूँ कि आप आने वाले दिनों में अच्छे कर्म-अच्छी व्यवस्था कर सकें। इसलिए मैं आप सब को धन्यवाद देता हूँ और आशीर्वाद भी देता हूँ और आपमें बैठी माँ भगवती को प्रणाम करता हूँ।

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