केंद्र और राज्य दोनों के लिए अबकी एक ही सरकार चुनेगा ओडिशा?

केंद्र और राज्य दोनों के लिए अबकी एक ही सरकार चुनेगा ओडिशा?

ओडिशा में नवीन पटनायक की लोकप्रियता अभी भी बरकरार है। वे राज्य के मुख्यमंत्री हैं। इससे पहले उनके पिता राज्य के मुख्यमंत्री रहे थे। इस तरीके से उड़ीसा में करीब 4 दशकों से पटनायक परिवार राज कर रहा है। ऐसे में भारतीय जनता पार्टी क्या इस बार उड़ीसा में सेंध लगा पाएगी, यह एक बहुत बड़ा सवाल है।

ओडिशा में लोकसभा और विधानसभा चुनाव दोनों साथ में होने हैं। क्या उड़ीसा के मतदाता इतने स्मार्ट हैं कि वे लोकसभा और विधानसभा दोनों में वोट डालने के बारे में अलग-अलग सोच सकें? इसके बारे में राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि ओडिशा के लोग इसे लेकर काफी हद तक जागरूक हैं। उन्हें पता है कि दिल्ली में उन्हें कौन सी सरकार चाहिए और भुवनेश्वर में कौन मुख्यमंत्री की गद्दी पर बैठना चाहिए।

ओडिशा में बहुत से ऐसे लोग हैं जो राज्य में मुख्यमंत्री के तौर पर नवीन पटनायक का ही समर्थन करते हैं, लेकिन दिल्ली में वे फिर से मोदी सरकार ही चाहते हैं। ऐसे में इस बात की पूरी संभावना है कि भले ही ओडिशा में भारतीय जनता पार्टी विधानसभा चुनाव में कुछ खास नहीं कर पाए, पर लोकसभा चुनाव में इस बार उसकी स्थिति बहुत हद तक सुधरने के कयास लगाए जा रहे हैं। यही वजह है कि इस बार भाजपा ने ओडिशा में एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया है।

पुरी से भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार संबित पात्रा भी लोगों को अपने पक्ष में करने के लिए काफी मेहनत करते हुए दिख रहे हैं। कांग्रेस ने भी यहां चुनाव प्रचार में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी है। साल 2014 के चुनावों में भी ओडिशा की जनता ने दिखाया था कि केंद्र में मोदी ही उनकी पसंद हैं, जबकि राज्य में नवीन पटनायक। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि 5 वर्षों के बाद ओडिशा की जनता का मूड कितना बदला है?

Related News
चुनाव : वोटरों को ले जा रही बस का एक्सीडेंट, तीन की मौत कई घायल
सोमवार की सुबह पीएम मोदी ने की ये खास अपील
इस मुस्लिम शख्स ने कहा, अयोध्या ही नहीं मुसलमान 11 विवादित मस्जिदें भी हिंदुओं को सौंप दें
चिदंबरम को एक और बड़ा झटका, ईडी को मिली तिहाड़ जेल में पूछताछ की इजाजत
भारत हिंदू राष्ट्र है, इस सच को कोई नहीं बदल सकता : मोहन भागवत
पी चिदंबरम से मिलने के लिए तिहाड़ जेल पहुंचे सोनिया गांधी और मनमोहन सिंह