आयुर्वेद के अनुसार हर दिन बादाम खाने के फायदे

आयुर्वेद के अनुसार हर दिन बादाम खाने के फायदे

मुंबई। आयुर्वेद शब्द का संस्कृबत में अनुवाद है 'जीवन का विज्ञान'। यह 5000 से भी अधिक वर्षों से भारतीय संस्कृ1ति का हिस्सा2 रहा है और सबसे पहले इसकी उत्प त्ति प्राचीन वैदिक संस्कृ ति से हुई थी। आयुर्वेद में उचित सिद्धांतों, आहार और कार्यों के साथ एक संतुलित जीवन जीने पर ध्यासन दिया जाता है।  


पश्चिमी एलोपैथिक दवाओं के विपरीत आयुर्वेद में रोग पर फोकस नहीं किया जाता है, बल्कि यह एक व्य क्ति के शरीर के माध्यथम से ऊर्जा के उचित प्रवाह को बरकरार रखने पर ध्याधन देता है, जिससे उसकी रक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने में मदद मिलेगी। आयुर्वेद उपचार का एक अधिक प्राकृतिक तरीका है, जिसमें एक व्याकपक समग्र दृष्टिकोण का इस्तेदमाल कर उपचार करने और शरीर, मन एवं आत्मा, को एकीकृत करने का प्रयास किया जाता है। दवा का यह रूप हमारी संस्कृकति में उसी तरह गहराई से जुड़ा है, जैसे कि बादाम खाने की परंपरा। 


आयुर्वेद के अनुसार, बादाम का सेवन करने के कुछ फायदे हैं और इसलिये आपको बादाम रोजाना खाने चाहिये सबसे पहली बात यह कि बादाम को सात्विक आहार माना जाता है। बादाम आपके शरीर के फैट को बढ़ाये बिना आवश्यपक ऊर्जा प्रदान करता है। आयुर्वेद का दावा है कि बादाम 'ओजस' उत्पनन्नो करने में मदद करते हैं, जोकि पाचन का सबसे बेहतरीन उपोत्पाकद है। बादाम को छीलकर खाने से पित्तै संबंधित किसी भी उग्र दोष को दूर करने में मदद मिलती है। पित्तक पाचन एवं मेटाबोलिज्म  की एनर्जी है। यह शरीर में प्रवेश करने वाली हर चीज की बायोकेमिकल प्रक्रियाओं को प्रबंधित करती है। बादाम दुनिया भर में विटामिन ई और एंटीऑक्सीीडेंट्स का सबसे बेहतरीन स्रोत है। 


    बादाम वजन घटाने में भी काफी मदद करता है। बादाम में मौजूद डायटरी फाइबर और हेल्दीे फैट्स सही वजन को प्रोत्साजहित करते हैं। बादाम में मौजूद फैट और कैलोरीज लंबे समय तक पेट के भरे होने का अहसास कराते हैं और आपको ब्लरड शुगर को रेगुलेट करते हैं, ताकि आप डायबिटीज से बचे रहें। प्रोटीन एवं फाइबर दोनों ही पेट भरे होने के अहसास को बढ़ाते हैं। इससे कैलोरी घटती है और आपको बार-बार भूख नहीं लगती। बादाम हेल्दी  मेटाबोलिज्मो को बढ़ावा देते हैं और मोटापे को कम करने में मदद करते हैं।   

   

     बादाम में जरूरी पोषक तत्व  भी मौजूद होते हैं, जो न्यूररोलॉजिकल ऐक्टिविटी को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। बढ़ते बच्चों  के आहार में भी बादाम को शामिल करने की सलाह दी जाती है, ताकि उनका बौद्धिक विकास अच्छीब तरह से हो पाये। आयुर्वेद के अनुसार, बादाम में  'प्राण' (प्युकरिटी) पाई जाती है और इसलिये यह सकारात्म‍क विचारों एवं खुशियों को प्रोत्साोहित करता है। बादाम जैसे नट्स शरीर की सफाई करते हैं और व्य क्ति के समग्र शारीरिक एवं मानसिक विकास को बढ़ावा देते हैं। ये नट्स दीर्घायु, सदाचार एवं शक्ति को बढ़ावा देते हैं। 


     बादाम में मैग्नीव‍शियम और विटामिन डी प्रचुर मात्रा में पाये जाते हैं। ये पोषक तत्व  नये बालों की वृद्धि में मदद करते हैं। बी6 और बी2 जैसे अन्य  विभिन्न  विटामिन्स  हेयर फॉलिकल्सत को मजबूत बनाने में मदद करते हैं। हेयर फॉलिकल्स  के कमजोर होने, प्रदूषण और डैंड्रफ के कारण बाल झड़ते हैं। इसलिये, बादाम बालों को झड़ने से रोकने में भी मदद करते हैं। फैटी एसिड्स त्वाचा से तेल के स्राव को नियंत्रित करने में भी मदद करते हैं, जिससे मुहांसों, ब्लैंकहेड्स और व्हावइटहेड्स को कम करने में मदद मिलती है। 


    आखिरी और सबसे महत्वफपूर्ण बात यह है कि बादाम खाने से कोलेस्ट्रॉ ल के स्त र को कम करने में मदद मिलती है। बादाम याद्दाश्तस (मैमोरी) को भी  बढ़ाते हैं और अल्ज़ालइमर एवं डिमेंशिया जैसे रोगों से बचाने में मदद करते हैं। कब्जब और क्रॉनिक कफ जैसी पुरानी बी‍मारियों के उपचार में भी बादाम उपयोगी होते हैं। ऐसा माना जाता है कि बादाम नर्वस सिस्टकम को भी स्टिमुलेट करते हैं और सभी ऊतकों एवं पांचों ज्ञानेन्द्रियों को पोषण प्रदान करते हैं। ये मांसपेशियों की ताकत और बॉडी मास को भी बढ़ाते हैं।

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