छोटे से जिले अमरेली की योगिता पटेल ढोलीवुड में धूम मचाने के लिए तैयार

छोटे से जिले अमरेली की योगिता पटेल ढोलीवुड में धूम मचाने के लिए तैयार

अहमदाबाद। मशहूर गुजराती लोकगायिका खिरैय्या, योगिता पटेल गुजराती म्यूजिक इंडस्ट्री में धूम मचाने के लिए पूरी तरह तैयार है| गुजरात के अमेरिली जिले के एक छोटे शहर मीठापुर (चायला) सेनाता रखने वाली योगिता पटेल धीरे धीरे गुजराती संगीत जगत  में सनसनीखेज खबर बन गयी है। योगिता को बचपन सेही संगीत का शौक था व उन्हें भरोसा था की एक न एक दिन वह अपने सपने ज़रूर पुरेकरेगी| शुरू से हीयोगिता बड़े सपने देखने व उन्हें हर हाल में पूरा करने में विश्वास रखती थीं।उन्होंने मात्र ९ वर्ष की आयु से ही गायक में अपना करियर शुरू कीया| अपने माता-पिता की इकलौती संतान होने के कारण, वह अपने मातापिता की लाड़ली थी| उनके परिवार कीआर्थिक स्थिति भी इतनी अच्छी नहीं थी की उन्हें किसी अच्छे संगीत शिक्षक के पाससगीत की शिक्षा लेने भेजा जा सके| उनके पिता केवल खेती बड़ी करते थे जिससे  सभी का गुज़ारा होता था, लेकिन योगिता नेकभी इसे अपने सपनों में रुकावट बनने नहीं दिया| इस तरह की प्रतिकूलता के बावजूद, उन्होंने अखिलभारतीय गंधर्व विश्वविद्यालय सांगली, महाराष्ट्र से अपनी पसंदीदा संगीत विशारद की डिग्री केसाथ-साथ अंग्रेजी साहित्य में अपनी कला को पूरा करने में कामयाबी हासिल की। १९ वर्ष की आयु में योगीता को पहली बार अपनी प्रतिभा को सभीके समक्ष रखने का मौका मिला, गाँव जेसिंगपारा, अमरेली में एक गौशाला इमारत के लिए धन जुटाने के लिए उन्हेंलोक गीत गाया, जहाँ उन्हें अपनीप्रतिभा प्रदर्शन के लिए 50 रुपये का इनाममिला और उसी क्षण योगिता ने ठान लिया की वह गायन को ही अपना मुकाम बनाएंगी| योगिता का 12 वीं में भी परिणाम उन्नत था जब संगीत विषय में उन्हें 100 में से 99 अंक मिले, जहाँ उनकेमाता-पिता ने भी समझ लिया कि संगीत ही योगिता का पहला और सच्चा प्यार है और गायनके प्रति उनके जुनून, समर्पण औरलगन  ने योगिता के करियर में बहुत मदद की।उनके माता-पिता ने उन्हें हमेशा गुजराती संगीत जगत में आगे बढ़ने के लिए प्रेरितकिया। एक निजी स्कूल के शिक्षिक से शादी करने के बाद उसने कभीनहीं सोचा था कि वह कभी भी इसे संभव बना सकती है लेकिन उनके पति और ससुराल वालोंने उनकी इस सोच को गलत साबित कर दिया और उन्हें अपने सपनों को हांसिल करने के लिएप्रोत्साहित किया। अपने परिवार के इस सहयोग ने उनके करियर में लंबी छलांग लगाई औरतब से उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।वह विभिन्न क्षेत्रों जैसे सांगली और पुना (महाराष्ट्र), राजकोट, अमरेली आदि मेंकई स्थानों पर लाइव शोज़ में दिखाई दीं। वह न केवल एक  उम्दा गायिका हैं, बल्कि एक बहुतअच्छी संगीतकारा भी हैं। उन्होंने अपने एल्बम के लिए कुछ गुजराती गीत भी लिखे हैं।उनके प्रसिद्ध एल्बम हैं - अमी कानबी काठियावाड़ी, परेवाडु, पानेतर, लाड़की और अवसार ना टोडल आदि।उन्होंने कीर्तिदान गढ़वी, मायाभाई आहीर, राजभा गढ़वी, साईराम दवे, खिमजी भरवाड जैसे प्रसिद्ध गुजराती गायकों के साथ भी कामकिया है। उनकी सुरीली आवाज,विश्वसनीयता औरहंसमुख स्वभाव के कारण उन्होंने कई शो आयोजकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है।

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