छात्रों में राष्ट्रवादी चिंतन को जगाना ही अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का मूल उद्देश्य है : सुनील अम्बेकर

छात्रों में राष्ट्रवादी चिंतन को जगाना ही अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का मूल उद्देश्य है : सुनील अम्बेकर

महान सांस्कृतिक,सामाजिक,चिंतक श्री सुनील अंबेकर जी जिन्होंने अपना पूरा जीवन राष्ट्र सेवा के लिए समर्पित किया है।आप अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय संगठन मंत्री है।आपके कुशल मार्गदर्शन में संगठन निरतंर आगे बढ़ रहा है। अम्बेकर ने संगठन का नेतृत्व आयोजन सचिव के रूप में बांग्लादेशी घुसपैठ के खिलाफ, तथा एबीवीपी के आयोजन सचिव और यूथ अगेंस्ट भ्रष्टाचार के सलाहकार सदस्य होने के नाते भ्रष्टाचार के विरोध आंदोलन किया। विश्व के सबसे बड़ा छात्र-संगठन के राष्ट्रीय संगठन मंत्री सुनील अम्बेकर जी से बिमलेश कुमार पाण्डेय की विशेष बातचीत का प्रस्तुत है अंश- 

सवाल : अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की स्थापना किन उद्देश्यों को लेकर की गई ?
जवाब :-जिस प्रकार से आजादी के आंदोलनों में आजादी के लिए विद्यार्थियों की भूमिका सक्रिय थी उतनी ही भूमिका इस देश को आगे बढ़ाने मेँ,तरक्की मेँ इस देश की समस्याओं को सुलझाने मेँ होगी और होनी चाहिये और ऐसे अवसर विद्यार्थियों को उपलब्ध होनी चाहिये।एक व्यापक राष्ट्रीय पुर्ननिर्माण का उद्देश्य लेकर विद्यार्थी परिषद की स्थापना हुई।

सवाल : अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का लक्ष्य ज्ञान,शील,एकता है। इसका मूल आशय क्या है?
जवाब : वास्तव में कहा जाय तो ज्ञान का मतलब नालेज की बात हो रही है।ज्ञान का मतलब मूल अर्थो मेँ बातों को जानना ,जिसको ज्ञान असन्तुलित हो उसे संतुलित हो।जिसमें हम अपने देश की संस्कृति, इतिहास, अपने लोग और भारत मेँ जो विशेषकर ज्ञान आया है कि भाई हमसबों का आपस मेँ एक रिश्ता है आपस मेँ सभी शांति से रह सकते है।एक दूसरे की सहायता कर सकते है परस्पर पूरक बन सकते हैं। 

सवाल : वर्तमान मेँ विश्वविद्यालय सिस्टम को लेकर विद्यार्थी परिषद का क्या रणनीति है?
जवाब : रणनीति यह है कि विश्वविद्यालयो मेँ शिक्षा का माहौल बने। शिक्षक पढ़ाये और छात्र पढ़े।क्योंकि जो संबंधित कॉलेजों है उसकी स्थिति बहुत खराब है।कॉलेजो के अपेक्षा विश्वविद्यालयो मेँ शिक्षा का माहौल कुछ अच्छा है। लेकिन प्रवेश,परीक्षा, परिणाम, होस्टल,शिक्षकों की नियुक्ति वेसिक जरूरतों का अभाव है। सारे रोजमर्रा की समस्या हैं। विश्वविद्यालयो की शिक्षापरख बनना है तो इसलिये सरकार को शिक्षा पर जीडीपी का 6%व्यय करने की जरूरत है। वर्तमान मेँ तो लगभग आधा ही खर्च हो पा रहा है।साथ ही समाज से उद्योगिक प्रतिष्ठान,पूर्व विद्यर्थियों से भी धन इकट्ठा करें ताकि विश्वविद्यालय अपने अनुसार प्रगति कर सके।विश्वविद्यालय के स्तर पर नए सिलेसब, नए-नए कोर्स शुरू हो ताकि विद्यार्थी अपने संपूर्ण कौशल और प्रतिभा को निखार सके।

सवाल : परिषद से आपका जुड़ाव कैसे हुआ? आप सफल व्यक्त्वि के रूप मेँ कैसे स्थापित हुए? अपने बारे मेँ बताए।
जवाब :  मेरा परिषद से जुड़ाव होना ये स्वयं के लिये सौभाग्य समझता हूं मुझे एक अच्छा सामाजिक कार्य करने का मौका प्रदान किया साथ ही मेरे जैसे हजारो लोगों को एबीवीपी अवसर प्रदान करती है। मेरे जैसा व्यक्ति सामान्य परिवार से आया जिसका कोई परिवारिक विशेष पृष्ठभूमि नही है। लेकिन जब परिषद का सानिध्य मिलता है तो हमारे अन्दर काम करने का जज्बा तैयार होता है। यही कारण है कि विद्यार्थी परिषद के साथ जुड़कर सच्चे, अच्छे भाव से देश और समाज के लिए कुछ न कुछ कर अपने जीवन को सार्थक बना सकते है।



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