40 साल बाद मिला इंसाफ! कोर्ट बोला-जुर्म के समय आरोपी नाबालिग था, रिहा करो

40 साल बाद मिला इंसाफ! कोर्ट बोला-जुर्म के समय आरोपी नाबालिग था, रिहा करो

नई दिल्ली 

भारतीय न्‍याय व्‍यवस्‍था में एक आरोपी को न्‍याय मिलने में 39 साल का समय लग गया। 39 साल बाद कोर्ट ने माना है कि जिस समय हत्‍या की वारदात को अंजाम दिया गया, उस समय आरोपी की उम्र 17 साल 6 महीने थी। जिसके आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी को नाबालिग करार देते हुए रिहा करने के आदेश जारी किए हैं। 

ये घटना 1980 की है. बिहार के गया में बनारस सिंह अपने चचेरे भाई के साथ एक होटल पहुंचे। इसी होटल में उसने भाई की हत्या कर दी। कुछ देर के बाद होटल स्टाफ को पता चला कि बनारस सिंह वहां से गायब हो गया। लेकिन बाद में पुलिस से उसे गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद गया की एक कोर्ट ने उसे हत्या के आरोप में आजावीन कारावास की सजा सुना दी।  वो 10 साल से ज्यादा समय तक जेल में रहा। 

इसके बाद नारस सिंह ने पटना हाईकोर्ट में सजा के खिलाफ अपील दायर की, लेकिन वहाँ से उन्हें निराश होना पड़ा, इसके बाद 2009 में सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में पटना हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी। दस साल बाद सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट से जवाब मांगा। रिपोर्ट में 10वीं के सर्टिफिकेट और बाकी रिकॉर्ड्स के हवाले ये साबित हो गया कि बनारस सिंह हत्या के समय 17 साल 6 महीने के थे। इसलिए कोर्ट ने आदेश दिया कि सिंह को तुरंत रिहा किया जाना चाहिए। 

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