रमन रेती के पावन स्थली में मोरारी बापू की रामकथा

रमन रेती के पावन स्थली में मोरारी बापू की रामकथा

मथुरा।रमन रेती की इस पावन स्थली में कोरोना की स्थिति को ध्यान में रखते हुए, प्रशासन के नियमों का पूर्णरूप से पालन करते हुए, चल रही रामकथा के दूसरे दिन बापू ने अपनी भावपूर्ण शैली में श्लोक और लोक के दोनों कूलों को छूते हुए रामकथा और कृष्णकथा का आज सुभग समन्वय किया था। इस कथा की केन्द्रवर्ती चौपाई .. *प्रेम तें प्रगट होहि मैं जाना*... का अर्थ करते हुए बताया कि ये शिवजी के वचन हैं और शिवजी ने जाना है कि परमात्मा प्रेम से ही प्रकट होते हैं,और कोई भी विधा इसमें उपयोग में नहीं ली जा सकती। बापू ने 'मानस' में से ही शिवजी, कौशल्या और सुतीक्ष्ण के अनुभव के प्रमाण दिए। आगे कहा कि भगवान को प्रकट करने के लिए स्थलांतर, विषयांतर, भाषांतर, देशांतर और कालांतर कुछ भी करने की जरूरत नहीं, प्रेम है  तो हम जहां हैं वहीं भगवान प्रकट हो जाएंगे। रमणरेती की भूमि प्रेम प्रकट करने की भूमि है ऐसा कहकर बापू ने पूरे ब्रज मंडल के प्रति अपना भाव प्रकट किया। रामचरितमानस प्रेम-शास्त्र ही है उसमें आदि, मध्य और अंत में प्रेम देवता की ही स्थापना की गई है। आगे बापू ने बताया की प्रेम के तीन प्रकार हैं -अति प्रेम, अतिशय प्रेम और परम प्रेम। इन तीनों का विशद विस्तार अद्भुत तरीके से किया।   *अचिन्त्याः खलु ये भावाः न तांस्तर्केण योजयेत्।* इस लोक को रखते हुए बापू ने कहा, शास्त्रों के कुछ शब्द हैं उसमें तर्क लगाने से बेहतर के उसमें रम जाओ। क्योंकि वे अचिंत्य हैं। भागवतजी के पांचो गीतों को अद्भुत कहते हुए बापू ने कहा कि मैं तो गोपीगीत का श्रोता हूं। उसके एक-एक शब्द पर तर्क करने जाएं तो कुछ भी फलित न होगा। अचिंत्य भावों का वह रास था। वे अल्फाज़ नहीं थे, केवल आंसू थे, एहसास था। 

      कथा के विषय को न्याय देते हुए बापू ने आगे कहा कि  हम में प्रेम प्रकट हुआ है तो उसके कुछ प्रमाण हैं। उसके चार प्रमाण 'मानस' में से ही बताते हुए कहा कि अति प्रेम की अवस्था में शरीर का पुलकित होना, वाणी का रुक जाना, चरणों में समग्रता से गिर जाना और नेत्रों से अश्रुधारा का बहना। अहल्या के प्रसंग से बापू ने इन चारों प्रकार की अवस्था को प्रतिपादित किया। वैरागी बाबा ने बताई बात को याद करके बापू ने जो कीर्तन स्वयं कृष्ण गाते थे, उस 'श्री राधे' का कीर्तन गाकर पूरे पंडाल को भाव निमग्न कर दिया था।

     आज, दूसरे दिन कथा के दौर को आगे बढ़ाते हुए रामनाम की महिमा, दशरथजी के परिवारजनों की वंदना और सखाओं की वंदना करके आज की कथा को विराम दिया।


Related News
किनानाराम भक्तों ने घर पर ही रह कर मनाया गुरु पूर्णिमा का पर्व
घर पर ही मनायें गुरू पूर्णिमा का पर्व - बाबा सिद्धार्थ गौतम राम जी
श्री नाथद्वारा में १० जुलाई से मोरारीबापू द्वारा मंगलकारी संवादी रामकथा का शुभारंभ
घर पर ही रह कर मनाएं अघोराचार्य महाराज श्री सिद्धार्थ गौतम राम जी का अभिषेक दिवस एवं संस्थान का स्थापना दिवस पर्व
रामसेतु की अध्यात्मिक नींव व्यासपीठ रख रही है, ऐतिहासिक नींव राजपीठ कर दें, ऐसी धनुषकोडी में ठाकुरजी से प्रार्थना
नहीं रहे सर्वेश्वरी समूह व बाबा कीनाराम स्थल के मंत्री